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प्रयागराज के युवाओं ने डेयरी उद्योग के जलवायु पर कुप्रभाव और बीफ निर्यात के परस्पर संबंध को आम जनमा नस तक पहुँचाया , 20 शहरों के अभियान में शामिल...



रिपोर्ट:- विजित कुशवाहा 

प्रयागराज:-  रविवार, 10 मई 2026: अर्थ डे के अवसरोपरान्त भारत के युवा देश के डेयरी उद्योग की नैतिकता और उससे होने वाली भारी पर्यावरणीय क्षति पर सवाल उठाया। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और यही व्यवस्था देश के व्यापक बीफ निर्यात को भी संभव बनाती है। प्रयागराज में युवा कार्यकर्ताओं ने चंद्रशेखर आज़ाद पार्क में एक सार्वजनिक इंस्टॉलेशन के माध्यम से डेयरी उद्योग के पर्यावरणीय कुप्रभाव और उसके बीफ उद्योग से जुड़े अनदेखे संबंध को उजागर किया।

वर्तमान में देश के 20 शहरों में युवा कार्यकर्ता इस सच्चाई की ओर ध्यानाकर्षित कर रहे हैं कि “दूध और बीफ की शुरुआत एक ही जानवर से होती है।” वे लोगों से डेयरी सप्लाई चेन में जानवरों की पूरी यात्रा और अंततः उनके बीफ उद्योग में पहुँचने की वास्तविकता पर विचार करने की अपील कर रहे हैं।

भारत में दूध और बीफ के संबंध पर वर्षों से बनी चुप्पी अब टूटने लगी है। @animalsaveindia द्वारा साझा की गई एक इंस्टाग्राम रील, जिसमें कौन बनेगा करोड़पति का एक क्लिप था, सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुई। इस क्लिप में होस्ट अमिताभ बच्चन उस समय चौंकते दिखाई दिए जब प्रतिभागी सिद्धार्थ शर्मा ने डेयरी उद्योग में पशुओं के हश्र की वास्तविकता बताई। इस रील को अब तक 1.6 बिलियन से अधिक व्यूज़ और 7.9 मिलियन लाइक्स मिल चुके हैं, जिससे यह दुनिया की सबसे अधिक देखी जाने वाली रीलों में शामिल हो गई है। बाद में अमिताभ बच्चन ने स्वयं भी कहा कि गाय का दूध उसके बछड़े के लिए होता है, न कि इंसानों की चाय के लिए।

यह सार्वजनिक प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य बन चुका है। यह इंस्टॉलेशन लोगों से दुनिया के सबसे बड़े डेयरी सेक्टर के पर्यावरणीय प्रभावों पर भी विचार करने की अपील करता है। भारत में एक लीटर दूध उत्पादन के लिए लगभग 1,078 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जो पहले से ही भूजल संकट झेल रहे राज्यों पर भारी दबाव डालता है। उत्तर प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहाँ यह समस्या सबसे गंभीर है। इसके अलावा, भारत के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने अपनी 2025 की उद्योग वर्गीकरण अधिसूचना में डेयरी और बूचड़खानों को “रेड कैटेगरी” में रखा है, जो सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग माने जाते हैं।

ये समस्याएँ बीफ उद्योग से अलग नहीं हैं क्यों किडेयरी और बीफ एक ही व्यवस्था के जुड़े हुए हिस्से हैं। पशु-अधिकार कार्यकर्ता ऋषिका ने कहा, “जब गाय और भैंसें दूध देना बंद कर देती हैं, तो उनमें से कई को बीफ सप्लाई चेन में बेच दिया जाता है। उत्तर प्रदेश का भारत का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य और सबसे बड़ा भैंस मांस निर्यातक राज्य होना दूध-बीफ संबंध का स्पष्ट प्रमाण है।”

डेयरी उद्योग का जलवायु पर कुप्रभाव मीथेन उत्सर्जन के रूप में भी सामने आता है, जो पृथ्वी के औसत तापमान में तीव्र वृद्धि का एक प्रमुख कारण है। उत्तर प्रदेश वर्तमान में भारत का सबसे अधिक “लाइवस्टॉक मीथेन” उत्सर्जित करने वाला राज्य है, जहाँ पशुओं के पाचन और मल से हर वर्ष लगभग 25.51 लाख टन मीथेन उत्सर्जित होती है। भारत में कुल मिलाकर लगभग 127 लाख टन लाइवस्टॉक मीथेन हर साल उत्सर्जित होती है। जल संकट के बढ़ते खतरे के बीच अब सवाल नीति-निर्माताओं ,संस्थानों और उद्योग जगत के सामने है कि भारत की खाद्य व्यवस्था इन जलवायु और नैतिक चुनौतियों का सामना कैसे करेगी। इस अवसर पर पशु-अधिकार कार्यकर्ता अंकितेश, हर्ष, सुमित, राधा, मयंक, शिवांश और शशांक भी उपस्थित रहे।

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