पत्नी की मौत के बाद मासूम बच्ची को सीने से लगाए इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा दीनानाथ...
रिपोर्ट:- विजित कुशवाहा
प्रयागराज:- प्रयागराज के करेली स्थित 60 फीट रोड पर संचालित नाज हॉस्पिटल (Naaz Hospital) इन दिनों एक गंभीर मामले को लेकर सुर्खियों में है। प्रसव के दौरान एक महिला की संदिग्ध मौत के बाद उसके पति ने अस्पताल प्रबंधन और वहां की चिकित्सकीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जौनपुर जिले के रहने वाले दीनानाथ मौर्य की जिंदगी उस वक्त उजड़ गई जब सामान्य प्रसव की उम्मीद में अस्पताल लाए जाने के बाद उनकी पत्नी की जान चली गई। आज दीनानाथ अपनी नवजात मासूम बच्ची को छाती से लगाए दर-दर भटकने और न्याय की गुहार लगाने को मजबूर हैं। इस हृदयविदारक घटना ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, उनकी चिकित्सकीय व्यवस्था, मानकों और डॉक्टरों की योग्यता पर एक बार फिर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
पत्रकार वार्ता में छलका दर्द: क्या है पूरा मामला?
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के नारद सभागार में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान दीनानाथ मौर्य ने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा खुलकर रखी। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी गर्भवती थीं और वे पूरी उम्मीद के साथ 25 अक्टूबर को पहली बार नाज हॉस्पिटल पहुंचे थे। परिवार को उम्मीद थी कि यहां उनकी पत्नी को बेहतर और सुरक्षित चिकित्सा मिलेगी। जुलाई तक लगातार इलाज इसी अस्पताल में चलता रहा।
दीनानाथ के अनुसार, 17 जुलाई को प्रसव पीड़ा होने पर वह अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। अस्पताल के स्टाफ ने सामान्य प्रसव से बच्ची के जन्म की बात कही, जिससे परिवार में शुरुआती खुशी का माहौल बन गया था। लेकिन यह खुशी चंद पलों की ही साबित हुई, क्योंकि प्रसव के तुरंत बाद उनकी पत्नी की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी।
अस्पताल पर इलाज में लापरवाही और मनमानी के गंभीर आरोप
पीड़ित पति ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब प्रसव के बाद उनकी पत्नी की हालत गंभीर हुई, तब अस्पताल में कोई भी विशेषज्ञ चिकित्सक (Specialist Doctor) मौजूद नहीं था।
समय पर इलाज का अभाव: पत्नी दर्द से तड़पती रहीं, लेकिन बार-बार डॉक्टर को बुलाने के बावजूद समय पर चिकित्सीय सहायता नहीं मिल सकी।
आईसीयू और रेफर करने का खेल: दीनानाथ के मुताबिक, सुबह करीब छह बजे चिकित्सक के आने की बात कहकर मरीज को आईसीयू में शिफ्ट किया गया, लेकिन उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके तुरंत बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें मरीज को किसी अन्य बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी।
दूसरे अस्पताल में मृत घोषित: जब दीनानाथ अपनी पत्नी को लेकर आनन-फानन में दूसरे अस्पताल पहुंचे, तो वहां के डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि महिला की मौत कई घंटे पहले ही हो चुकी थी। इसके बाद जब पीड़ित पति शव को लेकर वापस नाज हॉस्पिटल पहुंचा, तो वहां भारी हंगामा हुआ। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
सोशल मीडिया प्रचार और झूठे दावों का झांसा
दीनानाथ मौर्य ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने अंधाधुंध प्रचार और सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले उन वीडियो से प्रभावित होकर इस अस्पताल का चयन किया था, जिनमें सामान्य प्रसव और आधुनिक सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते थे। उनका आरोप है कि अस्पताल और वहां की महिला चिकित्सक से जुड़े प्रचार-प्रसार वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं, जिन्हें देखकर आम लोग आसानी से झांसे में आ जाते हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे भ्रामक दावों और अस्पताल के पास मौजूद वास्तविक चिकित्सकीय संसाधनों की भी गहनता से जांच की जानी चाहिए, ताकि अन्य लोग इस तरह के जाल में न फंसे।
आर्थिक शोषण और टूट चुका परिवार
दीनानाथ की आवाज में अपनी जीवनसंगिनी को खोने का दर्द साफ झलकता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने सामान्य प्रसव के नाम पर उनसे करीब 51 हजार रुपये वसूले। लेकिन आज उन्हें पैसों के जाने का गम नहीं है, बल्कि उस जीवनसाथी के चले जाने का दुख है जिसके बिना उनका पूरा संसार सूना हो गया है।
भावुक होते हुए दीनानाथ ने कहा कि आज उनकी गोद में एक मासूम बच्ची तो है, लेकिन उसे मां का आंचल और दुलार देने वाली मां इस दुनिया में नहीं है। जब वह बच्ची बड़ी होगी और अपनी मां के बारे में पूछेगी, तो वह उसे क्या जवाब देंगे—यह सवाल उनके भीतर की हर उम्मीद को तोड़ रहा है। उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा कि एक महिला की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं होती, बल्कि इसके साथ पूरा परिवार बिखर जाता है और बच्चों का भविष्य अधर में लटक जाता है।
प्रशासनिक शिकायत और मेडिकल बोर्ड का गठन
घटना के तुरंत बाद स्थानीय थाने में शिकायत किए जाने के बावजूद जब शुरुआती स्तर पर रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई, तो पीड़ित ने कानूनी और प्रशासनिक रास्ता अपनाया। उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई। इसके बाद, अपने अधिवक्ता के माध्यम से दीनानाथ ने सीएमओ के समक्ष औपचारिक शिकायत प्रस्तुत की।
शिकायत को संज्ञान में लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा मामले की जांच के लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड (Medical Board) का गठन किया गया है। फिलहाल दीनानाथ और उनके परिवार की निगाहें पूरी तरह से इस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
दीनानाथ मौर्य की प्रमुख मांगें
पत्रकार वार्ता के माध्यम से पीड़ित ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित मुख्य मांगें रखी हैं:
अस्पताल की मान्यता और मानकों की जांच: नाज हॉस्पिटल की रजिस्ट्रेशन, मान्यता, वहां उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं और आपातकालीन सेवाओं की उच्चस्तरीय जांच हो।
डॉक्टर की डिग्री और योग्यता की जांच: प्रसव कराने वाली और इलाज करने वाली चिकित्सक की शैक्षिक डिग्रियों व मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन की प्रामाणिकता की जांच संबंधित मेडिकल बोर्ड से कराई जाए।
कर्मचारियों और स्टाफ की उपलब्धता: घटना के वक्त अस्पताल में मौजूद ड्यूटी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की उपस्थिति व उनकी कार्यकुशलता की पड़ताल हो।
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई: यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही, फर्जीवाड़ा या स्वास्थ्य मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष और आगे की राह
दीनानाथ की यह लड़ाई सिर्फ एक पत्नी की मौत के इंसाफ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन तमाम आम परिवारों की आवाज है जो निजी अस्पतालों के भरोसे अपनी जिंदगी दांव पर लगा देते हैं। उन्होंने कहा, “मेरी पत्नी अब वापस नहीं आ सकती, लेकिन अगर मेरी इस कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई से किसी दूसरी बच्ची को उसकी मां से और किसी पति को उसकी पत्नी से जुदा होने से बचाया जा सके, तो यही मेरे लिए सबसे बड़ी जीत होगी।”
फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग की जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था में कहां-कहां खामियां थीं और प्रशासन इस मामले में क्या कड़े कदम उठाता है।



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